पावन आध्यात्मिक धरोहर

श्री सच्चियाय माता मंदिर का इतिहास

ओसियां स्थित सच्चियाय माता मंदिर का ऐतिहासिक अभिलेखीय चित्र (1897)
अभिलेखीय चित्र, 1897

प्राचीन उत्पत्ति एवं इतिहास

ओसियां (राजस्थान) स्थित सच्चियाय माता मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में परमार राजवंश के महाराजा उत्पलदेव के संरक्षण में हुआ था। यह पावन तीर्थ लगभग 1,200 वर्ष प्राचीन है। ओसियां का प्राचीन नाम उकेश या उपकेशपुर-पत्तन था, जहाँ प्रसिद्ध जगत भवानी चामुंडा माता का भव्य मंदिर प्रतिष्ठित था।

आध्यात्मिक महत्व एवं कुलदेवी परंपरा

माँ सच्चियाय परमार/सांखला/सोढ़ा वंश की परम आदरणीय कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं। इसके साथ ही माँ राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश एवं सम्पूर्ण उत्तर भारत के अनेक समुदायों जैसे चारण, ब्राह्मण, स्वर्णकार (सोनी), ओसवाल एवं माहेश्वरी परिवारों की भी आराध्य कुलदेवी हैं। ओसियां थार मरुस्थल की सुरम्य तलहटी में जोधपुर-बीकानेर राजमार्ग पर स्थित है।

भव्य वास्तुकला एवं स्थापत्य धरोहर

लाल बलुआ पत्थर की बारीक नक्काशी से निर्मित यह मंदिर गुर्जर-प्रतिहार वास्तुकला शैली का उत्कृष्ट शिखर प्रतीक है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित सच्चियाय माता मंदिर में प्रवेश करते ही एक भव्य लघु दुर्ग जैसा आलौकिक अनुभव होता है, जिसकी शुरुआत इसके अलंकृत तोरण द्वार से होती है।

मंदिर का मुख्य गर्भगृह माँ चामुंडा को समर्पित है, जिसके चारों ओर सूर्य, शिव, गणेश एवं लक्ष्मी-विष्णु के उप-मंदिर स्थित हैं। कला प्रेमियों के लिए पूर्व दिशा में विष्णु-लक्ष्मी का नक्काशीदार रूप तथा उत्तर दिशा में भगवान विष्णु के वराह अवतार की अद्भुत प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।